• मानवता के आधार पर हल की जाये फेरीवालों की समस्या : क्षीरसागर



    मुम्बई : अखिल मानवाधिकार आर्गनाइजेशन के राष्ट्रीय अध्य्क्ष श्री नारायण क्षीरसागर ने कहा है कि मुंबई के फेरीवालों की समस्या मानवीय आधार पर हल की जानी चाहिए ।
    आज यहाँ जारी एक बयान में उन्होंने कहाकि मुम्बई के फेरीवालों के प्रति शासन प्रशासन का रवैया बेहद दिल दहलाने वाला है। मुम्बई में लगभग पंद्रह लाख परिवार प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से फेरीवाला व्यवसाय पर निर्भर है। ये पूरा वर्ग गरीब और मेहनतकश है। दरअसल मुम्बई में मिलों के बंद होने के बाद लाखों मिल-मज़दूर बेरोज़गार हो गए थे। अपने परिवार का पेट पालने के लिए उनमे से बड़ी संख्या में मज़दूरों ने फेरीवाला व्यवसाय शुरू कर दिया। चूंकि मुम्बई के रेलवे स्टेशनों पर ही ज़्यादा भीड़ होती है इसलिए ज़्यादातर फेरीवाले स्टेशन के आसपास ही धंधा करते थे।

    उन्होंने कहाकि पिछले दिनों एल्फिंस्टन स्टेशन पर हुई भगदड़ की घटना के बाद फेरीवालों को टार्गेट किया गया जिसके कारण स्टेशन के आसपास धंधा करने वाले लाखों फेरीवालों का व्यवसाय बंद हो गया और उनके परिवार भुखमरी के कगार पर हैं। फेरीवालों को हॉकर्स जोन में जगह देने की बातें हमेशा होतीं हैं लेकिन उनपर अमल नही हो रहा है।

    श्री क्षीरसागर ने कहाकि अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार ने फेरीवालों के बारे में एक कानून बनाया था लेकिन मुम्बई में उस पर भी सही ढंग से अमल नही हो रहा है। दरअसल मुंबई में फेरीवालों की समस्या को लोग गरीबों की समस्या के रूप में न देख करके उसे वोट बैंक के हिसाब से देखते हैं। यहां इन गरीबों का मसला जाति ,धर्म और क्षेत्र की राजनीति में फंसकर रह गया है ।इस देश में एक ओर जहां बड़े-बड़े धन्नासेठ बैंकों का करोड़ों रुपए लेकर विदेशों में बस जाते हैं और वहां चैन की बंसी बजाते हैं वहीं आंधी ,बरसात और धूप का सामना करते हुए अपनी मेहनत के बल पर धंधा करने वाले फेरीवालों के सामानों के साथ सड़क पर शासन - प्रशासन के लोगों द्वारा जिस प्रकार क्रूरता की जाती है वह बहुत चिंताजनक है। यहां सवाल यह उठता है कि यदि इन फेरीवालों को जीविका चलाने का अवसर नही दिया गया और इस समस्या को मानवीय ढंग से हल नही किया गया तो इतने परिवारों का क्या होगा?मजबूरी में अगर ये लोग कोई गलत रास्ते चुनते हैं तो इसके लिए जिम्मेदार कौन होगा? 

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